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अब मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से मिलेगा रोजगार, इस राज्य सरकार की बड़ी पहल

उत्तरप्रदेश, गोरखपुर – गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में चढ़ाए गए श्रद्धा के फूल अब रोजगार का जरिया बनेंगे. बता दें कि मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती बनाई जा रही है. इसके लिए घरेलू महिलाओं को प्रशिक्षण देकर कुटीर उद्योग के लिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है. सीआईएसआर-सीमैप (केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान) लखनऊ के तकनीकी सहयोग से महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र चौक जंगल कौड़िया द्वारा निर्मित अगरबत्ती की ब्रांडिंग “श्री गोरखनाथ आशीर्वाद” नाम से की गई है. इसके उत्पादन से लेकर विपणन तक की व्यवस्था गोरखनाथ मंदिर प्रशासन के हाथों है.

 

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इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से अगरबत्ती बनाने के इस प्रयास से वेस्ट को वेल्थ में बदलने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना साकार हो रही है. इससे आस्था को सम्मान मिल रहा है. साथ ही यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी बड़ा कदम है.अब तक मंदिरों में चढ़ाए गए फूल फेंक दिए जाते थे या नदियों में प्रवाहित कर दिए जाते थे. इससे आस्था भी आहत होती थी और कचरा भी खड़ा हो रहा था.महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र और सीमैप ने इन फूलों को महिलाओं की आय का जरिया बना दिया है. उन्होंने कहा कि इस कार्य में समूहों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को जोड़ा जाएगा. इससे महिलाएं घर का काम करते हुए अच्छी आय अर्जित कर सकेंगी.

 

ऐसे बनती है फूलों से अगरबत्ती

मंदिर में चढ़ाए गए फूलों को संग्रहित करने के बाद उन्हें एक मशीन में डालकर सूखा पाउडर बना लिया जाता है. फिर इस पाउडर को आटे की तरह गूंथ कर लकड़ी के आटे के साथ स्टिक पर परत के रूप में चढ़ाया जाता है. अंत में लेपित स्टिक को तरल खुश्बू में भिगोकर सूखा लिया जाता है. इस कार्य में प्रशिक्षण प्राप्त एक महिला अपना घरेलू कामकाज निपटा कर प्रतिमाह चार से 5 हजार रुपए की आय अर्जित कर सकती है.सीमैप लखनऊ के निदेशक डॉ प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के किसी मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से पहली बार अगरबत्ती बनाने का काम हो रहा है. शीघ्र ही लखनऊ के चन्द्रिका देवी मंदिर में भी ऐसा ही प्रयास शुरू किया जाएगा.

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