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‘तारक मेहता’….पिता घनश्याम नायक को याद कर विकास बोले- अस्पताल में एडमिट होने से एक दिन पहले….

पॉपुलर शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (‘Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah’) में घनश्याम नायक द्वारा निभाया गया ‘नट्टू काका’ (‘Nattu Kaka’) का रोल एक ऐसा किरदार था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। एक साल तक कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद एक्टर ने 3 अक्टूबर 2021 को मुंबई में आखिरी सांस ली थी। अब हाल ही में मीडिया से घनश्याम नायक के बेटे विकास नायक ने बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने अपने पिता के आखिरी दिनों के बारे में विस्तार से बताया है।

 

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पापा कहते थे-जिस दिन मरूंगा, उस दिन मुझे मोक्ष मिल जाएगा

विकास नायक ने कहा, “पापा के जाने के बाद शुरूआत के 2-3 दिनों तक हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि कैसे क्या करें। पिछले एक साल से हम सभी मिलकर उनकी बिमारी (कैंसर) से लड़ रहे थे। सच कहूं तो पापा हमें हिम्मत देकर गए थे कि इस सिचुएशन में हमें अपने आपको कैसे संभालना है। वो तैयार थे और आखिरी महीनों में बस यही कहते थे-जिस दिन मरूंगा उस दिन मुझे मोक्ष मिल जाएगा। वे बहुत ही पॉजिटिव इंसान थे और हमसे कहते थे कि यदि उन्हें कुछ हो जाए तो हमें रोना नहीं है, हमें दुख नहीं मनाना है। उनका मानना था कि उन्होंने पूरी जिंदगी लोगों को हंसाया है, उनके जाने के बाद कोई रोना नहीं चाहिए।”

 

पापा ने मां और हम सभी को इस सिचुएशन के लिए मेंटली तैयार करके रखा था

विकास आगे कहते हैं, “मुझे याद है कि मेरे पापा यदि किसी की बैठक में जाते (मरने के बाद की रीती) थे तो वहां भी वे एनवायरनमेंट लाइवली बनाने की कोशिश करते थे। वहां पर लोग शोक मनाने जाते हैं, लेकिन पापा उनके घरवालों का दुख कम करने और उन्हें हंसाने की कोशिश करते थे। कहीं-न-कहीं मां को भी हमने इस सिचुएशन के लिए तैयार कर लिया था। मेरी मां को मेरे पापा से ज्यादा हेल्थ इश्यू हैं। पिछले 8 सालों से उन्हें अस्थमा की बीमारी है। वो ज्यादा चल भी नहीं पाती हैं। पापा की आखिरी 2 महीने में हालत ज्यादा खराब हो गई थी। ऐसे में पापा ने मां और हम सभी को इस सिचुएशन के लिए मेंटली तैयार करके रखा था। वो मस्ती-मस्ती में कहते थे-मैं नहीं चाहता की मेरे साथ तुम लोग भी चलो।”

 

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पापा 100 साल तक जीना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ

घनश्याम की बीमारी के बारे में विकास कहते हैं, “मजाक-मजाक में पापा कहा करते थे कि वे 100 साल तक जीना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जुलाई 2021 में जब हमने रिपोर्ट निकाली थी, तब पता चला कि कैंसर उनके पूरे शरीर में फैल गया है। पिछले साल सितंबर से हमने जितने भी ट्रीटमेंट किए थे वे सभी फेल हो गए। हमने कीमोथेरेपी बंद कर दिया और आयुर्वेदिक-होम्योपैथिक ट्रीटमेंट शुरू कर दिया। हालांकि, कोई असर नहीं हुआ। डॉक्टर ने पापा से कह दिया था कि उनके पास जीने के लिए कुछ महीने भी हो सकते हैं, कुछ साल भी। उन्होंने ये बात बहुत पॉजिटिवली ली। उन्होंने घर आकर मां से कहा कि वे अब काफी संतुष्ट महसूस कर रहे हैं। वे खुश थे कि उनका ट्रीटमेंट बंद हो जाएगा। वे नहीं चाहते थे कि उनकी जिंदगी में ऐसा कोई वक्त आए, जहां उन्हें ट्यूब से खाना-खाना पड़े। लाचारी आने से पहले ही उन्होंने विदाई ले ली।”

 

पिछले 10-12 सालों में हमारी आर्थिक स्थिति काफी संभली

पापा के साथ बिताए पुराने दिनों को याद करते हुए विकास कहते है, “मेरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पापा ने पैसे लिए थे और वो इतनी अभिमानी थे कि कभी किसी के पैसे रखे नहीं। जब तक पैसा लौटाते नहीं, उन्हें चैन नहीं पड़ता। पिछले 10-12 सालों में हमारी आर्थिक स्थिति काफी संभली और हमें कभी किसी से पैसे की मदद नहीं मांगनी पड़ी।”

 

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आखिरी वक्त तक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ देखा

घनश्याम नायक के आखिरी दिनों के बारे में विकास कहते हैं, “उन्हें म्युजिक का बहुत शौक था। आखिरी के पलों में उन्होंने रेडियो में खूब सारा म्युजिक सुना, ज्यादातर गुजराती गाने। फिर गुजराती शो-रिक्शा राशि वाली देखते। तारक मेहता का अब तक का उन्होंने एक भी एपिसोड मिस नहीं किया। वो शो में नहीं थे इसके बावजूद गणेश चतुर्थी स्पेशल एपिसोड, उन्होंने बैठकर देखा और टीम की मेहनत की खूब तारीफ की। हमने 29 सितंबर को उन्हें अस्पताल में एडमिट किया था, 28 की रात तक उन्होंने ‘तारक मेहता’ देखा था। शो में खुद को बहुत मिस करते थे और फिर से शो में लौटने की बात कहते रहते थे। वे मेकअप के साथ विदा होना चाहते थे और हमने मेकअप आर्टिस्ट बुलवाकर उनकी ये इच्छा पूरी की थी।”

 

पापा को डायरी लिखने का शौक था

घनश्याम नायक को डायरी लिखने की आदत थी। उन्होंने अपने आखिरी दिनों में भी अपने विचार उस डायरी में लिखे थे। इस बारे में विकास कहते हैं, “पापा अपनी एक-एक छोटी बात भी डायरी में लिखते थे। सुबह नाश्ते में क्या खाया, दोपहर में किस्से मिले, शाम में मंदिर में पुजारी से मिले, अपनी हर बात लिखते थे। अपनी खुशी व्यक्त करते। बिमारी की वजह से कई बार वे कुछ खा नहीं पाते थे, वो भी उन्होंने लिखा था। उन्हें ब्लैक एंड वाइट फिल्मों का बहुत शौक था। हर दिन वे टीवी पर कुछ न कुछ देखते और रात में तकरीबन 12.30 बजे तक सोते थे। ये बात भी उन्होंने लिखी है।”

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